कौटिल्य की गुप्तचर एवं सुरक्षा नीति और आधुनिक भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीतिः आंतरिक सुरक्षा से सामरिक कूटनीति तक

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मनीषा (शोधार्थी)
डॉ सुशीला बेदी दुबे

Abstract

कौटिल्य का राजनीतिक चिंतन भारतीय राज्य-व्यवस्था, शासन-कला और सुरक्षा-दृष्टि का अत्यंत व्यावहारिक रूप प्रस्तुत करता है। अर्थशास्त्र में वर्णित गुप्तचर व्यवस्था, आंतरिक नियंत्रण, शत्रु-नीति, दंडनीति और राज्य-सुरक्षा संबंधी विचार यह स्पष्ट करते हैं कि कौटिल्य के लिए राज्य की स्थिरता केवल प्रशासनिक क्षमता पर निर्भर नहीं थी, बल्कि सूचना-संग्रह, सतर्कता, आंतरिक शांति, सीमाई सुरक्षा और रणनीतिक निर्णय-क्षमता पर भी आधारित थी। उन्होंने गुप्तचर तंत्र को शासन का आवश्यक अंग माना, क्योंकि बिना सही सूचना के राज्य न तो आंतरिक षड्यंत्रों को पहचान सकता है और न ही बाहरी शत्रुओं की नीति को समझ सकता है।


आधुनिक भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति भी बहुस्तरीय स्वरूप रखती है। आज सुरक्षा का अर्थ केवल सैन्य शक्ति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें सीमा-सुरक्षा, आंतरिक शांति, आतंकवाद-रोधी नीति, साइबर सुरक्षा, खुफिया तंत्र, सामरिक कूटनीति, समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे अनेक आयाम शामिल हैं। भारत को एक ओर सीमा-विवाद, आतंकवाद, अलगाववाद, साइबर खतरों और समुद्री चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, वहीं दूसरी ओर उसे वैश्विक और क्षेत्रीय कूटनीति के स्तर पर भी सतर्क रहना पड़ता है।


प्रस्तुत शोध-पत्र का उद्देश्य कौटिल्य की गुप्तचर एवं सुरक्षा नीति को आधुनिक भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति के संदर्भ में समझना है। इसमें यह विश्लेषण किया गया है कि कौटिल्य द्वारा प्रतिपादित सूचना-संग्रह, आंतरिक स्थिरता, शत्रु की पहचान, गोपनीय नीति, दंड और सुरक्षा-सतर्कता जैसे विचार आज के राष्ट्रीय सुरक्षा विमर्श में किस प्रकार वैचारिक रूप से प्रासंगिक हैं। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि आधुनिक भारत की सुरक्षा-नीति में तकनीक, संस्थागत ढाँचे और लोकतांत्रिक मूल्यों का विस्तार अवश्य हुआ है, किंतु सुरक्षा, सूचना और रणनीतिक सतर्कता की मूल आवश्यकता आज भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

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How to Cite
[1]
मनीषा (शोधार्थी) and डॉ सुशीला बेदी दुबे, “कौटिल्य की गुप्तचर एवं सुरक्षा नीति और आधुनिक भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीतिः आंतरिक सुरक्षा से सामरिक कूटनीति तक”, IEJRD - International Multidisciplinary Journal, vol. 11, no. 1, p. 8, Feb. 2026.

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