राजस्थान के राजपूत स्थापत्य में द्वार, झरोखे, छतरियाँ और जालियों का सांस्कृतिक एवं सौंदर्यात्मक महत्व

Abstract View PDF Download PDF

##plugins.themes.academic_pro.article.main##

चारू बारी
डॉ. सोनू सारण

Abstract

राजस्थान का राजपूत स्थापत्य भारतीय कला-परंपरा का एक अत्यंत समृद्ध और विशिष्ट अध्याय है। यहाँ के किले, महल, हवेलियाँ, स्मारक और राजप्रासाद केवल राजनीतिक शक्ति या राजसी वैभव के प्रतीक नहीं हैं, बल्कि वे तत्कालीन समाज की सांस्कृतिक संवेदना, सौंदर्य दृष्टि, जीवन-शैली और स्थापत्य कौशल को भी अभिव्यक्त करते हैं। राजपूत स्थापत्य में द्वार, झरोखे, छतरियाँ और जालियाँ ऐसे महत्वपूर्ण घटक हैं जो भवनों की संरचना को उपयोगी बनाने के साथ-साथ उन्हें सांस्कृतिक अर्थ और कलात्मक सौंदर्य भी प्रदान करते हैं।


द्वार राजपूत स्थापत्य में प्रवेश, सुरक्षा, प्रतिष्ठा और सत्ता के प्रतीक रहे हैं। किलों के विशाल द्वार केवल रक्षा व्यवस्था का भाग नहीं थे, बल्कि वे राज्य की शक्ति और गौरव का दृश्य परिचय भी देते थे। झरोखे राजसी जीवन, स्त्री-परंपरा, जनदर्शन और सौंदर्यबोध से जुड़े हुए स्थापत्य तत्व थे। छतरियाँ स्मृति, सम्मान, वीरता और राजपूती गौरव की प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति के रूप में विकसित हुईं। इसी प्रकार जालियाँ प्रकाश, हवा, गोपनीयता और सजावट के संतुलित उपयोग का सुंदर उदाहरण प्रस्तुत करती हैं।


प्रस्तुत शोध-पत्र का उद्देश्य राजस्थान के राजपूत स्थापत्य में द्वार, झरोखे, छतरियाँ और जालियों के सांस्कृतिक एवं सौंदर्यात्मक महत्व का अध्ययन करना है। इसमें यह स्पष्ट करने का प्रयास किया गया है कि ये स्थापत्य तत्व केवल सजावटी या संरचनात्मक भाग नहीं थे, बल्कि वे सामाजिक मर्यादा, स्त्री-जीवन, राजसत्ता, स्मृति, धार्मिकता, सुरक्षा और कलात्मक अभिव्यक्ति से गहराई से जुड़े हुए थे। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि राजपूत स्थापत्य में उपयोगिता और सौंदर्य का अद्भुत संतुलन मिलता है, जिसके कारण राजस्थान की स्थापत्य परंपरा आज भी भारतीय सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण अंग मानी जाती है।

##plugins.themes.academic_pro.article.details##

How to Cite
[1]
चारू बारी and डॉ. सोनू सारण, “राजस्थान के राजपूत स्थापत्य में द्वार, झरोखे, छतरियाँ और जालियों का सांस्कृतिक एवं सौंदर्यात्मक महत्व”, IEJRD - International Multidisciplinary Journal, vol. 11, no. 1, p. 9, Feb. 2026.

References

  1. कुमार, राजेन्द्र. राजस्थान की स्थापत्य परंपरा.
  2. सक्सेना, विजय कुमार. राजपूत कला और वास्तु विरासत.
  3. जैन, कैलाशचंद्र. राजस्थान की कला, संस्कृति और इतिहास.
  4. गुप्ता, मोहनलाल. राजस्थान के ऐतिहासिक स्मारक.
  5. व्यास, हरिराम. राजस्थान के राजमहल और हवेलियाँ.
  6. पारीक, नंदकिशोर. राजस्थानी कला एवं सांस्कृतिक प्रतीक.
  7. मिश्रा, सत्यनारायण. भारतीय मध्यकालीन स्थापत्य कला.
  8. शर्मा, आर. के. राजपूतकालीन कला और संस्कृति.
  9. खंडेलवाल, महेशचंद्र. राजस्थान की विरासत और स्थापत्य सौंदर्य.
  10. राजस्थान के राजपूतकालीन किले, महल, द्वार, झरोखे, छतरियाँ और जालियों से संबंधित ऐतिहासिक एवं स्थापत्य अध्ययन।

Most read articles by the same author(s)

Obs.: This plugin requires at least one statistics/report plugin to be enabled. If your statistics plugins provide more than one metric then please also select a main metric on the admin's site settings page and/or on the journal manager's settings pages.